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अब इंसान ही नहीं, कीड़े भी करेंगे गंगा की सफाई

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हड़कंप एक्सप्रेस . गंगा नदी की सफाई के तमाम जुगत कर रही सरकारी एजेंसियों द्वारा किया जा रहा है. इसी कड़ी में एक नया जुगत राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) द्वारा किया गया है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह प्रक्रिया नदियों कि सफाई के लिए मील का पत्थर साबित होगी. केंद्र सरकार नयी तकनीक’बैक्टेरियल बिओमेडिटेशन’ का सहारा लेकर गंगा कि सफाई कि तयारी में है. जिसमे मल खाने वाले कीड़ों का प्रयोग कर गंगा को साफ़ करने कि कवायद शुरू करने का सफल परीक्षण पटना के बाकरगंज नाले से हो चुकी है. शोधकर्ताओ के अनुसार पटना में किया गया परीक्षण सफल होने के बाद इस प्रक्रिया को अपना कर नदियों के सफाई कार्य के दो पायलट प्रोजेक्ट मंजूर कर दिए गए है. इनमे से एक पटना एवं दूसरी इलाहबाद में चलायी जाएगी.
दरअसल बैक्टेरियल बॉयोमेडिटेशन तकनीक में मौजूद प्रदूषक तत्वों को नष्ट करने के लिए एक खास तरह के मलभक्षी कीड़े का इस्तेमाल किया जाता है.जो पानी को बिना नुकसान पहुचाये उसमे मौजूद मल, रासायनिक, जैविक कचरे को खा जाता है. इस प्रक्रिया में पानी को नुक्सान न पहुंचने के साथ साथ दुर्गन्ध भी नहीं आती.
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने एक नोट में कहा कि जल सोधन संयंत्रों के तैयार होने तक गंगा और उसकी सहायक नदियों में नालों से मल-जल का रोकना असंभव है.

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