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World Mental Health Day: विश्व मानसि‍क स्वास्थ्य दिवस, ज़िंदगी को खुश होकर जीना सीखें

“मानसिक बीमारी भी शारीरिक बीमारियों की भाँति है। इसे भी उपचार की आवश्यकता होती है। स्ट्रेस, डिप्रेशन किसी को भी मौत तक ले जाती है और ये समस्या तेजी से सभी को अपने कैद में लेती जा रही है। इन्ही समस्याओं को ध्यान में रखते हुए 10 अक्टूबर को ”विश्व मानसि‍क स्वास्थ्य दिवस या मानसिक दिवस” मनाया जाता है।

देश में मानसिक स्वस्थता का हाल

देश में तकरीबन पाँच करोड़(150 मिलियन) लोग डिप्रेशन से ग्रसित है। राजस्थान में करीब 13 लाख लोग मानसिक रोगों से ग्रसित है और उत्तर प्रदेश का हाल इससे भी बुरा है। उत्तर प्रदेश स्टेट मेंटल हेल्थ सर्वे रिपोर्ट में एक बात सामने आई है। सैंपल सर्वे के आधार पर तैयार रिपोर्ट में बताया गया है, कि प्रदेश के 20 लाख से ज्यादा कामकाजी युवाओं में जिंदगी जीने का हौसला कम हुआ है।

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में आयोजित तीन दिवसीय भारतीय साइकियाट्रिक सोसाइटी सेंट्रल जोन के वार्षिक अधिवेशन में इस रिपोर्ट पर बात की गई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि प्रदेश के 1.95 करोड़ लोग किसी न किसी तरह की मानसिक रोग का शिकार हैं। यह संख्या लगातार बढ़ रही है।

यह रिपोर्ट प्रदेश के कुछ जिलों में सैम्पल सर्वे के आधार पर तैयार की गई। संगठन के सेंट्रल जोन के नवनियुक्त चेयरमैन डॉ. रवि कुमार के मुताबिक रिपोर्ट ख़तरनाक स्थित उजागर करती है। ओपीडी में आने वाले लगभग 95 फीसदी मरीज अवसाद के किसी न किसी स्टेज में हैं। युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी, नशे की प्रवृति के चलते भी अवसाद की समस्या बढ़ रही है।

एनसीआरबी (राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो) की 2015 की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में वर्ष 2014 में प्रतिदिन 12 व्यक्तियों ने आत्महत्या की, जबकि पूरे साल भर में 4459 लोगों ने आत्महत्या की। यह आंकड़ा पिछले सालों के मुकाबले ज़्यादा है। भारत में होने वाली कुल आत्महत्याओं में से 7.4 प्रतिशत आत्महत्या करने वाले व्यवसायिक(कामकाजी) लोग ही होते हैं।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सर्वे के अनुसार देश में चिकित्सा व्यवसाय से जुड़े 80 प्रतिशत से अधिक डॉक्टर तनाव से ग्रसित रहते है। वहीं निजी सेवा क्षेत्र में काम करने वाले 50 प्रतिशत से अधिक लोग स्थाई तनाव से पीड़ित रहते है।

मनोरोग विशेषज्ञों की कमी के आँकड़े

  • 6000 विशेषज्ञ 130 करोड़ की जनसंख्या पर देश में
  • 50000 विशेषज्ञ 30 करोड़ की जनसंख्या में अमेरिका में
  • 75 प्रतिशत मनोरोगियों को मिल पाता है इलाज
  • 20 लेक्चरर हैं मनोरोग पर एमबीबीएस पाठ्यक्रम में
  • 01 महीने साइकियाट्री की ट्रेनिंग एमबीबीएस पाठ्यक्रम में
  • 15 दिन इंटर्नशिप एमबीबीएस की मनोरोग विभाग में
  • कैसे पहचाने मानसिक रोग  रोगी को

    • अपने में खोए रहने वाले, चुप रहने वाले, कम दोस्ती करने वाले व स्कीजायड व्यक्तित्व वाले लोगों में स्कीज़ोफ्रीनिया ज़्यादा होता है।
    • अगर आपको याद नहीं कि आप आखिरी बार खुश कब थे।
    • बिस्तर से उठने या नहाने जैसी डेली रुटीन की चीजें भी आपको टास्क लगती हैं।
    • आप लोगों से कटने लगे हैं।
    • भावनाओं या मिजाज में तेजी से या नाटकीय परिवर्तन होना।
    • आप खुद से नफरत करते हैं और अपने आप को खत्म कर लेना चाहते हैं।
    • एकाग्रता में समस्या, याददाश्त कमजोर होना, या समझने में मुश्किल होना।
    • अगर आप इन बातों के अलावा गूगल पर खुदकुशी के तरीके सर्च करते हैं तो आपको तुरंत मदद लेनी चाहिए।
    • कुछ दवाओं, रासायनिक तत्वों, धातुओं, शराब व अन्य नशीले पदार्थों आदि का सेवन मनोरोगों के होने का कारण बन सकते हैं।
  • मानसिक बीमारी व्यक्ति के, सोचने तथा काम करने के तरीके को प्रभावित करती है। विंहांस(VIMHANS) में प्रैक्टिस करने वाली साइकॉलजिस्ट डॉ. नीतू राणा कहती हैं, ”इन सभी चीजों को रोका जा सकता है। हालात संभाले जा सकते हैं। इलाज मुमकिन है। ज़रूरत है बीमारियों को पहचानने की। ऐसा नहीं है कि मानसिक रोग का इलाज नहीं है। ये भी समाज का हिस्सा होते हैं। बस इन्हे प्यार और सही चिकित्सा की ज़रूरत होती है।

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